Shachi Mishr
Description
*यानि की फुल्ली फालतू* कॉलेज में भी बड़ी नाइंसाफी थी। फर्स्ट ईयर में डेढ़ सौ सीट और सिर्फ तीस लड़कियाँ। दोस्ती के लिए लड़कियाँ कम पड़ने लगीं। इनमें कु
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छ ऐसी भी थी जो कि किसी को घास नहीं डालती थीं। इस कारण कुछ लोगों ने अपने शौक को दूसरी चीजों की और मोड़ लिया था। कुछ लोग 'स्पाइस गर्ल' की तर्ज पर 'स्पाइस ब्याएज' बन गए । जिसमें सबसे आगे अभय सिंह राजपूत यानी कि राजपूत साहब थे। उनके साथ लोग जुड़ते गए और उनका कारवाँ बनता गया। इनमें शेखर सूदन, मनदीप चावला के साथ गौरव जैन जैसे लोग भी थे जो 'रनिंग जोकर' की तरह हर ग्रुप में अपनी पैठ बनाए हुए थे। शेखर सूदन के पिता रेलवे में थे और रेल के हर कोच में लिखे अनुरोध, 'भारतीय रेल आप की संपत्ति है', उसके अपने हिस्से की संपत्ति उसके पास यहाँ मौजूद थी जिसके कारण यारों ने उसका नाम ही इंडियन रेलवे रख दिया था। ये सभी शाम के समय सज सँवर कर रागिनी मार्केट में पहुँच जाते वहाँ और वहाँ पर आस पास के इलाके से सामान खरीदने आने वाली लड़कियों से अपनी आँखें सेंकते थे। इसी बीच राजपूत साहब की किसी लड़की से दोस्ती हो गई और वे उससे छुप छुप कर मिलने लगे। यारों ने बहुत पूछा पर नहीं बताया, पीछा किया पर कुछ पता नहीं चला। एक दिन उससे लम्बी पूछताछ हुई। हर आदमी अपनी ओर से उसकी खिचाई कर रहा था। धीरे धीरे बात खत्म होने लगी तो उसने अंत में कहा कि, "बायो डाटा नहीं बताना तो मत बता पर यार फोटो तो दिखा दो।" "फोटो देख कर क्या करेगा?" "पसंद आएगी तो एक कॉपी करवा लूँगा और तकिए के नीचे रख कर सोऊँगा।"
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
JVP Publication Pvt Limited
Month-Year
Nov, 2020
ISBN
ISBN-13: 9788194652625
ISBN-10: 8194652626
Language
Hindi
No. of Pages
112
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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