Manjula Rana
Description
मेरी संवेदनाओं में समकालीन जीवन की सम्पूर्ण व्यथा-कथा के साथ इन सबको स्वीकार कर ऊपर उठने का आग्रह है फिर चाहे यह चिन्ता किसी स्त्री की हो या पुरुष की।
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इन कहानियों में सृजनात्मकता का भाव है किसी उत्पादन का नहीं इसीलिए समय की तपिश और अनुभव की मार्मिकता के साथ शब्दों को बरतने का सलीका भी देखने को मिलता है। बिना किसी पूर्वाग्रह के ये मन की भट्ठी के ताप से सराबोर हैं। मानवीय करुणा और सक्रिय प्रतिरोध के साथ इनमें स्त्री बनाम पुरुष की बेमानी बहस की कोई जगह नहीं है वरन् स्त्री-मन के उस नायाब कोने पर दस्तक अवश्य दी गयी है, जहाँ बिना किसी हस्तक्षेप के वह अपनी सलोनी लुनाई के साथ पेश आती है। यह प्रचलित धारणाओं से बाहर की सच्चाई है। प्रेम का यह अधिकार समस्त सामाजिक वर्जनाओं के बावजूद पूरी शिद्दत के साथ स्त्री को देना एक हीरक गवाक्ष खोलने के सदृश्य है और यह साहस इन कहानियों का मुख्य स्वर है। पहाड़ की पीड़ा को पीठ पर लादे किन्तु शर्त मुस्कुराने की हो या सामाजिक कुरीतियों का बोझा ढोती परिस्थितियाँ हों अथवा अनमेल विवाह के साथ संस्कारों के आवरण में लिपटी नारी का उजला चित्र हो, अपने समय की विभीषिकाओं से बराबर रू-ब-रू होती और उनसे जूझते हुए जीवन का उजास पूरी बेबाकी के साथ प्रस्तुत किया गया है। मानव मन की विजय यात्रा का जयघोष करती ये कहानियाँ दुनिया से जद्दोजहद करके आत्मीयता के अहसास की शैलीगत अभिव्यंजना हैं।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Short Stories (single author)
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Vāṇī Prakāśana
Month-Year
Dec, 2019
ISBN
ISBN-13: 9789388684521
ISBN-10: 9388684524
Language
Hindi
No. of Pages
295
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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