Narender Sehgal
Description
व्यथित जम्मू कश्मीर एक दस्तावेज़ी दृष्टि है उस पीड़ा, संघर्ष और ऐतिहासिक अन्याय की, जिसने जम्मू-कश्मीर को वर्षों तक अस्थिरता और संकट में झोंक दिया।
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नरेंद्र सहगल द्वारा लिखित यह पुस्तक न केवल एक संवेदनशील इतिहास है, बल्कि एक राष्ट्रवादी चेतना की पुकार भी है—जो पाठकों को इस भूभाग की वास्तविकता, उसकी सांस्कृतिक पहचान और राजनैतिक षड्यंत्रों की गहराई तक पहुँचाती है।
लेखक ने धारा 370, कश्मीरी हिंदुओं का पलायन, आतंकवाद, वैचारिक संघर्ष और राष्ट्रविरोधी ताकतों की भूमिका पर तीक्ष्ण विश्लेषण प्रस्तुत किया है, जो जम्मू-कश्मीर की विडंबनाओं को उजागर करता है।
व्यथित जम्मू कश्मीर केवल अतीत का वर्णन नहीं करता, यह वर्तमान की चेतावनी और भविष्य की दिशा भी निर्धारित करता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अनिवार्य है जो भारत की अखंडता, कश्मीर की वास्तविक स्थिति, और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को गहराई से समझना चाहते हैं।
व्यथित जम्मू कश्मीर एक गंभीर और जागरूक साहित्यिक प्रयास है—जो न केवल पढ़ा जाना चाहिए, बल्कि समझा और आत्मसात किया जाना चाहिए।
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