Acharya Mayaram ‘Patang’
Description
‘गीता’ कालजयी गं्रथ है। यह भक्ति के साथ-साथ कर्म की ओर प्रवृत्त करती है। अपने कर्तव्य-पथ से भटक रहे अर्जुन को श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान देकर ही कर्म-
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पथ पर प्रवृत्त किया। इसलिए हमारे जीवन में गीता का बहुत व्यावहारिक उपयोग है; महती योगदान है।
विद्यार्थी काल में ही गीता का भाव समझ गए तो यह जीवन में पग-पग पर काम आएगा। जीने की कला आ जाएगी। आपत्तियों तथा कष्टकर परिस्थितियों में निराशा नहीं घेरेगी। अपने-पराए और मित्र-शत्रु के मोह से मुक्त होने का ज्ञान हो जाएगा। अधिकांश लोग सेवानिवृत्त होकर गीता पढ़ते हैं। जब सारा जीवन मोह; लोभ; काम; क्रोध और अहंकार की भेंट चढ़ गया; दुःख और संतापों का ताप सह लिया; तिल-तिल कर मरते रहे; फिर गीता पढ़ी तो क्या लाभ हुआ? पाप और पुण्य कर्मों का फल तो भोगना निश्चित ही हो गया!
इस पुस्तक को विशेष रूप से छात्रों-विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। गीता के हर अध्याय में जो महत्त्वपूर्ण श्लोक हैं; जिन्हें स्मरण किया जा सके; गाया जा सके; उन्हें संकलित किया गया है। स्पष्ट है कि यह संपूर्ण गीता नहीं है; बल्कि मात्र प्रेरणा है। इसे पढ़कर छात्र सन्मति पाएँ; नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए सन्मार्ग पर चलकर जीवन में सफलता के शिखर पर पहुँचें; यही इस पुस्तक के लेखन का उद्देश्य है।
विद्यार्थियों के चरित्र-निर्माण तथा कर्तव्य-पथ पर सतत चलने की प्रेरणा देनेवाली एक अनुपम पुस्तक।
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Genres
Literary Fiction
Fantasy
Tags
Fiction
Fantasy
Epic
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789384344597
ISBN-10: 9384344591
Language
Hindi
No. of Pages
144
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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