Nirmal Kumar Chakravarti
Description
रवींद्रनाथ के बाद बांग्ला कविता की धारा को जीवनानंद दास ने बलपूर्वक मोड़ा। उन्होंने उसे जो दिशा प्रदान की, वह न तो रहस्यवाद की दिशा थी, न यथार्थवाद की
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। उनके हाथों बांग्ला में एक सर्वथा नई कविता की सृष्टि हुई, जिसे अतियथार्थवादी कविता कहना उचित होगा। इस कविता की परंपरा पश्चिम में थी, लेकिन जीवनानंद ने उसे इस कौशल के साथ बांग्ला में उतारा कि वह उसमें कहीं से भी विजातीय नहीं प्रतीत हुई। जैसे पश्चिम और पूर्व की काव्य-मनोदशा बदले हुए देश-काल में स्वयं मिल गई हो। यह एक नया काव्य-लोक अथवा माया-लोक था। माया-लोक, जो अपने आकर्षण में जितना नया था, आस्वाद में उतना ही अनूठा। लेकिन जैसे रवींद्रनाथ का रहस्यवाद यथार्थ-शून्य नहीं वैसे ही जीवनानंद का मिथकों, स्वप्नों और फंतासी से बना हुआ काव्य-लोक यथार्थ-विरोधी नहीं। सच्चाई तो यह है कि आधुनिक जीवन की नई सच्चाइयों को इसी तरह से पकड़ा जा सकता था। पाठक प्रस्तुत पुस्तक में संकलित कविताओं को पढ़ते समय यह महसूस करेंगे कि उनमें एक गहरी उदासी और अवसाद का वातावरण है। यह वस्तुतः उस परिवेश की देन है, जो रवींद्रनाथ क्या, उनके बाद के प्रगतिशील चेतना वाले कवियों के परिवेश से भी भिन्न है। ताज्जुब नहीं कि आज बांग्ला ही नहीं, हिंदी कविता के पाठक भी जीवनानंद दास से गहरी आत्मीयता अनुभव करते हैं। निर्मल कुमार चक्रवर्ती की पृष्ठभूमि में बांग्ला कविता है और अग्रभूमि में हिंदी कविता। स्वभावृतः उन्होंने अपने भाषांतर में दोनों कविताओं की प्रकृति की रक्षा करने का भरसक प्रयास किया है। - नंदकिशोर नवल
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