रेखा झा
Description
किसी भी देश की उन्नति उस देश के नागरिकों पर निर्भर करती है। भारत जैसे विशाल राष्ट्र में पुरुषों की तरह महिलाएं भी देश के विकास एवं प्रगति में बराबर की
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हिस्सेदार एवं जिम्मेदार मानी जाती हैं । हिंदी साहित्य को अपने सृजनात्मक और कलात्मक लेखन से गौरवान्वित करने वाली ऐसी ही महान शख्सियत हैं - बिहार की रहने वाली कवयित्री श्रीमती रेखा झा जी। अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं अंधविश्वासों पर प्रहार करना इनकी रचनात्मकता को साफ तौर पर दर्शाता है। विषय चाहे कोई भी क्यों न हो, अपनी काव्य शैली के बल पर उसे जनमानस के दिलों-दिमाग में उतारना कवयित्री की खासियत है। नारीशक्ति के समाज में योगदान को लेखिका ने पन्नों पर जिस खूबसूरती से उतारा है उसका कोई सानी नहीं है ।इनकी कविताओं में राष्ट्र प्रेम एवं देशभक्ति की भावना की झलक स्पष्ट तरीके से दिखाई देती है। परमपिता परमात्मा के प्रति असीम आस्था व विश्वास को सर्वोपरि रखकर लेखिका ने अपनी लेखन व काव्य शैली को एक नया आयाम दिया है,जो कि अति प्रशंसनीय है। बात जब पर्यावरण की आती है तो कवयित्री का प्रकृति प्रेम उनकी रचनाओं में प्रविष्ट हो कविताओं को और अधिक भव्य बना देता है। कविताओं के माध्यम से मानव मन में आस,विश्वास तथा आत्मविश्वास जगाने में कवयित्री को महारत हासिल है ।गुरु के बिना इंसान का जीवन दिशाहीन होता है इसलिए गुरू की महिमा का गान इनकी रचनाओं में किया गया है । विविध अलंकारों एवं रस छंदों के सुंदर प्रयोग से कविता शैली जीवंत हो उठी है। मातृभूमि एवं जन्म भूमि के प्रति अगाध स्नेह कवयित्री के सुदृढ़ चरित्र की तरफ इशारा करता है।
- पिंकी सिंघल
लोकप्रिय हिंदी कवयित्री एवं
वरिष्ठ सहयोग इंकलाब मंच।
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