Chiranjeev Sinha
Description
चिरंजीव सिन्हा के इस संग्रह की कहानियाँ एक अलग दुनिया में ले जाती हैं। वो दुनिया जो हमारी देखी हुई अपनी सी दुनिया है लेकिन इन कहानियों में डूबकर जब हम
...
बाहर निकलते हैं तो लगता है कि मानो हम एक नयी दुनिया से होकर लौटे हैं। पर्दे के पीछे की कहानियाँ या फिर यूँ कहें कि वो कहानियाँ जिनको कोई अख़बार जगह नहीं देता। कहानीकार का काम यही है कि वो ऐसे सवाल उठाये जो कोई नहीं उठा रहा। यह संग्रह इस काम को बख़ूबी करता है। इस कहानी संग्रह की आमुख कहानी को पढ़ते हुए दिल के हर कोने से चीख़ निकल जाती है। डर और अनहोनी के बीच से गुज़रती हुई हर लाइन कभी तो रोंगटे खड़े कर देती है और कभी अयाचित और आशातीत प्यार-स्नेह आँखों में पसरे हताशा को परे धकेल सूखे कोरों को ख़ुशी से नम कर देती है। आमुख कहानी लियो और इस संग्रह की अन्य इक्कीस कहानियाँ रहस्य, रोमांच से भरी हैं और इन सबके बीच सहज प्रवाह में बहती रहती है, प्यार की बूँदों से नहाये इन्सानियत की सोंधी बयार। सच कहूँ तो इन कहानियों को पढ़कर आप यह कहे बिना नहीं रह पायेंगे “मैंने ऐसा पहले नहीं पढ़ा।
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Genres
No genres specified
Tags
Arborist Merchandising Root
Self Service
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Vāṇī Prakāśana
Month-Year
Nov, 2022
ISBN
ISBN-13: 9789355181497
ISBN-10: 9355181493
Language
Hindi
No. of Pages
228
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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