Pooja Prajapti
Description
दबे स्वरों की चिंघाड़’ युवा कवियत्री पूजा प्रजापति का पहला कविता संग्रह है। छोटी-बड़ी लगभग एक सौ कविताओं से युक्त इस संग्रह की कविताओं में सर्वत्र स्त्र
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ी स्वर गुंजायमान है, जिसमें क्षोभ, निराशा, दुःख, दर्द, प्रेम, घृणा, शिकायत, संघर्ष और जिजीविषा आदि जीवन की समस्त अनुभूतियों की अभिव्यक्ति मिलती है। स्त्री के मन और शरीर पर जूठन के निशान हैं, जो उसे दर्द भी देते हैं और दंश भी। हमेशा दूसरों की इच्छा और भावनाओं के लिए जीने वाली स्त्री की अपनी भी कुछ इच्छा, आकांक्षा और भावनाएँ हैं,
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