A.P.J. Abdul Kalam
Description
मैं यह पुस्तक इसलिए लिख रहा हूँ ताकि मेरे युवा पाठक उस आवाज को सुन सकें; जो कह रही है-' आगे बढ़ो ' । अपने नेतृत्व को हमें समृद्धि की ओर ले जाना चाहिए
...
। रचनात्मक विचारोंवाले युवा भारतीयों के विचार स्वीकृति की बाट जोहते-जोहते मुरझाने नहीं चाहिए । जैसाकि कहा गया है-चितन पूँजी है; उद्यम जरिया है और कड़ी मेहनत समाधान है ।
युवा पीढ़ी ही देश की पूँजी है । जब बच्चे बड़े हो रहे होते हैं तो उनके आदर्श उस काल के सफल व्यक्ि्य त्व ही हो सकते हैं । माता-पिता और प्राथमिक कक्षाओं के अध्यापक आदर्श के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं । बच्चे के बड़े होने पर राजनीति; विज्ञान; प्रौद्योगिकी और उद्योग जगत् से जुड़े योग्य तथा विशिष्टब नेता उनके आदर्श बन सकते हैं ।
-इसी पुस्तक से
भारत के पूर्व राष्ट्ररपति महामहिम डॉ. ए.पीजे. अब्दुल कलाम ने आनेवाले वर्षों में भारत को एक महाशक्िआदर के रूप में स्थापित करने का स्वप्न देखा है; और इसे साकार करने की संभावना उन्हें भारत की युवा शक्िषो में नजर आती है । हम बच्चों- युवाओं को प्रेरित कर उन्हें शक्ि.्र-संपन्न भारत की नींव बना सकें; यही इस पुस्तक को लिखने का उद्देहश्य है ।
प्रत्येक चिंतनशील भारतीय के लिए पठनीय पुस्तक ।
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Genres
No genres specified
Tags
Arborist Merchandising Root
Self Service
Subjects
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2008
ISBN
ISBN-13: 9788173154232
ISBN-10: 8173154236
Language
Hindi
No. of Pages
Not specified
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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