Ibrahim Ashk
Description
ताज़ा शेर मज़्मूआ (ग़ज़ल संग्रह) है जो बहुत जल्द शाया होकर मंजरे-आम पर आने वाला है। इसका नाम ताज़ाकार इसलिए रखा गया है के तमाम कयनाथ ही ताज़ा ब ताज़ा के उसूल
...
पर आधारित है। हर लम्हा एक दूसरे से मुख़्तलिफ़ होने के साथ-साथ ताज़गी से भरपूर होता है। कुदरत का यही उसूल इनसानी ज़िन्दगी को हर वक़्त ताज़गी देकर लुफ्त से भरपूर बनाये रखता है।<br>&apos;ताज़ाकार&apos; में पूरी कोशिश की गयी है कि फ़िक्रों-ख़याल कि ताज़ाकारी और हुस्नो-कमाल की रंगीनी बरकरार रहे। उम्मीद है ये कलाम इल्मो-अदब की कसौटी पर खरा उतरेगा और इसे बार-बार पढ़ा जाएगा।
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Genres
History
Tags
Asian
Poetry
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Manjul Publishing
Month-Year
Mar, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789389647723
ISBN-10: 938964772X
Language
Hindi
No. of Pages
170
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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