मीरा ठाकुर
Description
खामोशियों के भी अपने स्वर होते हैं— बस उन्हें सुनने वाला एक मन चाहिए। “तुषारविंद” हाइकुओं का ऐसा संग्रह है, जहाँ अनकहे जज़्बात शब्दों की छोटी-सी धुन ब
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नकर उभरते हैं। हर हाइकू मन की उन कोमल तरंगों को छूता है, जो अक्सर शब्दों से परे रह जाती हैं—कभी प्रेम की हल्की आहट, कभी यादों की नमी, तो कभी आत्मा की गहराइयों से उठती कोई अनजानी पुकार। यह पुस्तक उन पलों का संगीत है, जब मन खुद से बात करता है—धीरे, सच्चे और बेहद करीब। हर पंक्ति एक एहसास है, हर हाइकू एक छोटी-सी दुनिया। अगर आप भी खामोशी में छुपी धुनों को महसूस करना चाहते हैं, तो यह संग्रह आपके लिए है— जहाँ शब्द कम हैं, पर भाव अनंत। यह हाइकू-संग्रह जीवन के छोटे-छोटे पलों, प्रकृति के रंगों और मन की गहराइयों को तीन पंक्तियों में संजोता है। हर हाइकू एक एहसास है—जो पढ़ते ही दिल में उतर जाता है।
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