कुमार हरीश
Description
कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं, जो सबको पता हैं, फिर भी उनके बारे में कोई नहीं जानता। कहो तो, वो इतनी आम हो चुकी होती हैं कि उनकी ख़ासियत बस वो समझता है जि
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सकी वो आप बीती हैं। ये हक़ीकत तो होती हैं, मगर जिस इंसान की हक़ीकत होती हैं, वो खुद ख़्वाबों में रहा करता है। कोई इनमें ख़ुदा होता है, तो कोई अपने ख़ुदा से जुदा होता है। ये एक सफर होती हैं, जिसमें इन्सान अपनी मंज़िल की ताक लगाये, रस्ते पे चलना भूल जाता है। ऐसी ही एक आपबीती है “तड़प”, जो किसी के दिल की गहराई में एक अरसे से दफ़न है। “तड़प” जज़्बातों का एक ऐसा “संग्रह” है जिसका एक-२ लफ्ज़ आपके दिल के अंदर छिपे हुए एहसासों को करीब से छू कर निकल जायेगा। हो सकता है ये आपकी आँखों को नम भी कर दे।
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