Vasundhara Seshadri Gvs
Description
स्वर सागर में मेरी भावनानुसार नाम जागृत हुआ। शब्दों का मेल सागर सा विशाल है, जो सागर सा अनंत है । जिसमें शब्दों ने कविताओं का रूप धारण कर लहरों सी शोर
...
करती हुई इस महा सागर में अनंत लेख साथ लिए, धरा प्रवाह सी चलती जाए, लहरों सी शोर मचाये । हर लहर संग कहानी बनती जाए रूप, रास, स्वर (हर शब्द के कदमों से रेत पर, समुन्द्र किनारे अपनी छाप दिखाते जाए, अनंत लहरों संग बहती जाये । हर शब्द में भाव छुपाए ।
Read more