Ajay Shankar Pandey
Description
इस पुस्तक में अत्यंत विरोधाभासपूर्ण मनःस्थिति से गुजर रहे समाज में कानून-व्यवस्था स्थापित करने वाले तंत्र की सफलता या असफलता का मूल्यांकन करने का प्रय
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ास किया गया है । एक ऐसे समाज में शांति-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना उतना दुष्कर कार्य नहीं है, जो प्रशासनिक एवं पुलिस ढाँचे को अपना ही सृजन एवं अंग स्वीकृत करता हो, परंतु जिस समाज की मनोदशा यह रही हो कि प्रशासनिक तंत्र उसके लक्ष्यों के मार्ग में बाधक है उनका दुश्मन है उसमें शांति-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना अत्यंत कठिन एवं दुष्कर कार्य अवश्य होता है । जिस समाज में शांति छोड्कर या प्रशासनिक तंत्र को चुनौती देकर अपना लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद हो, ऐसे मनोभावों वाले समाज में कानून-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना किस प्रकार, कितनी सफलता के साथ संभव हो सका ?-निष्कर्षात्मक रूप में ऐसे मूल प्रत्ययों को विश्लेषणात्मक रूप से स्थापित करने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है । पुस्तक में राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे स्वतंत्रता आदोलन एवं विचारधारा को चरणबद्ध तरीके से विवेचित किया गया है । राष्ट्रीय आदोलन के प्रत्येक चरण की विवेचना के साथ-साथ तत्वरणों में उत्तर प्रदेश में अपराध स्थिति एवं पुलिस तंत्र के गठन एवं उनमें होने वाले परिवर्तनों को भी विवेचना का विषय बनाया गया है । यह देखने एवं मूल्यांकित करने का प्रयास किया गया है कि राष्ट्रीय आदोलन की विचारधारा एवं राष्ट्रीय आदोलन की घटनाओं ने अपराध स्थिति को कहीं तक प्रभावित किया है । पुलिस तंत्र के ढाँचे में होने वाले परिवर्तनों को भी राष्ट्रीय आदोलन की घटनाओं, अपराध स्थिति पर उसके अनुवर्ती प्रभाव के दृष्टिकोण से विवेचित करने का प्रयास किया गया है ।
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