Udayan Vajpeyi
Description
उदयन बाजपेयी की इन कहानियो में हम अतिगल्प धर्मिता के एक ऐसे तत्त्व के सक्रिय देखने है जो हमारी भाषा मे एक अनोखी गल्प -सृष्टि का ि शलान्याम करता प्रत
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ीत होता है । इन कहानियो का दूसरा तत्त्व इनमे विचार और अनुभूति के वे बारीक और उलझे हुए धागे है, जो इन कहानियो की अतिगल्प धर्मिता के बावजूद इन्हे परीक था की अनुकृति होने से बचाते हुए एक लगभग अप्रचलित -सा कथा -रूप प्रदान करते हैं । हम कह सकते हैं कि ये कहानियां परीकथा की अनुकृति! नहीं । उसकी पैरोडी हैं । रन कहानियो का सबसे मुखर और केन्द्रीय, यद्यपि नितान्त अदृश्य चरित्र ' समय ' है । वस्तुओ. चरित्रो और घटनाओं का अधिष्ठान या निरा एक आयाम होने से अधिक यहां यह समय स्वयं वस्तु ओ चरित्रा और घटनाओं के हाथों बनती-मिटती एक हस्ती ३ ' ये कहानियां समय की रचना 'करती हैं और (इस तरह) मानो प्रस्तावित करती हैं कि समय का प्रत्येक रूप एक संकल्प-सापेक्ष रचना है । इन कहानियों की प्रस्तावित-गल्प -सृष्टि हमारे यथार्थ कहे जानेवाले संसार से अनुकूलित होने या उसे अनुकूलित करने की बजाय उसे ' देखने ' का एरक ऐसा ' लोकस ' उपलब्ध कराती है, जहां से स्वयं इस संसार का गल्प उजागर हो सके । दूसरे शब्दों मे वे कथा और सृष्टि के बीच मान्य द्वैत का प्रतिकार करती हैं ओर ऐसा करते हए वे अपनी विश्वसनीयता की कीमत चुकाती हैं । अविश्वसनीयता को ये कहानियाँ अलंकार के नही, रस के रूप मे प्रस्तावित करनी हैं । और इस सबसे ऊपर इनमे गहरी रागात्मकता और मसक्ति है जो इनके अन्तनिर्हित बौद्धिक तनाव औग् मुवहमे वातावरण -को स्पन्दनशील और स्पृहर्णाय बनाती है ।
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Genres
No genres specified
Tags
Literary Collections
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 1994
ISBN
ISBN-13: 9788171783045
ISBN-10: 817178304X
Language
Hindi
No. of Pages
134
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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