Ramdeo Shukla
Description
हिंदी-भोजपुरी के स्वनामधन्य कवि-कथाकार पं. अक्षयवर दीक्षित जी को इस ‘स्मरणांजलि’ में सहज पुलकित भाव से स्मरण किया गया है। देश या विदेश में वैभवपूर्ण ज
...
ीवन जीते हुए दीक्षित जी के पुराने छात्र कहीं अकस्मात् मिलते, उनके चरण-स्पर्श करके अपना नाम बताते, तब उनके गुरू और उद्धारकर्त्ता को जो सुख मिलता उसका आस्वादन करके पाठक स्वयं आनंदित होंगे। दीक्षित जी के साथ काम करने वाले सहयोगियों के संस्मरण बताते हैं कि कठोर श्रम करके वे कर्त्तव्य-पालन के साथ दूसरों के लिए अनुकरणीय आदर्श भी उपस्थित करते रहते थे। चौकीदार-चपरासी जैसे लोगों के प्रति दीक्षित जी का वत्सल-भाव उनकी और उनके परिजनों के सुख- दुख में सहायक होता था। कुछ ऐसे लोगों की टूटी-फूटी शब्दावली में लिखे संस्मरण दीक्षित जी की महानता का नया आयाम खोलते हैं।
‘स्मरणांजलि’ के इस आयोजन में ‘अजब’ का उल्लेख अपरिहार्य है। अक्षयवर दीक्षित, जगतनारायण सिंह और ब्रजभूषण तिवारी के नामों के प्रथम अक्षरों से निर्मित ‘अजब’ नाम की जो पुस्तक छपी वह हर तरह से अजब-गजब है। उसकी चर्चा अनेक संस्मरणों में मिलेगी।
हिंदी-भोजपुरी के सुप्रसिद्ध और लोकप्रिय साहित्यकार अक्षयवर दीक्षित के सम्पूर्ण व्यक्तित्व और कृतित्व का दस्तावेज़।
Read more
Genres
Picture Books
Tags
Antiques & Collectibles
Books
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Sarv Bhasha Trust
Month-Year
Jul, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789390502042
ISBN-10: 9390502047
Language
Hindi
No. of Pages
266
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?