Osho
Description
आज सारी मनुष्यता बीमार है। प्रकृति के चारों तरफ दीवारें उठा दी गई हैं और आदमी उनके भीतर बैठ गया है। और यह आदमियत स्वस्थ नहीं हो सकेगी जब तक कि चारों त
...
रफ उठी हुईं दीवारों को हम गिरा कर प्रकृति से वापस संबंध न बांध सकें।
परमात्मा के संबंध सबसे पहले प्रकृति के सान्निध्य के रूप में ही उत्पन्न होते हैं। परमात्मा से सीधा क्या संबंध हो सकता है? सीधा परमात्मा तक क्या पहुंच हो सकती है? उस अनंत पर हमारे क्या हाथ हो सकते हैं? हमारे क्या पैर बढ़ सकते हैं? लेकिन जो निकट है, जो चारों तरफ मौजूद है, उसके बीच और हमारे बीच की दीवारें तो गिराई जा सकती हैं। उसके बीच और हमारे बीच द्वार तो हो सकता है, खुले झरोखे तो हो सकते हैं। लेकिन वे नहीं हैं। और प्रकृति का सान्निध्य कुछ मूल्य पर नहीं मिलता, बिलकुल मुफ्त मिलता है। लेकिन हमने वह छोड़ दिया। हमें उसका खयाल नहीं रह गया है। आदमी की पूरी आत्मा इसीलिए रुग्ण हो गई है।
ओशो
पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
* क्या हैं झूठे ज्ञान से मुक्ति के उपाय?
* आनंद का भाव कैसे विकसित हो?
* क्या अर्थ है अभेद का? अद्वैत का?
* कृतज्ञ कैसे हों?
Read more
Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
ALPHA ED
Month-Year
Feb, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789390088645
ISBN-10: 939008864X
Language
Hindi
No. of Pages
132
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?