Rakesh Acharya
Description
शिव देवों के देव और गुरुओं के गुरु हैं। किसी भी युग में उनसे श्रेष्ठ गुरु न तो हुआ है, और न होगा। मौजूदा युग में कई गुरु अपने शिष्यों को उपलब्ध ही नही
...
ं हो पाते हैं। उनके शिष्य सीधे अपने गुरु से नहीं मिल पाते और मार्गदर्शन के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं। ऐसे में भगवान् शिव को गुरु धारण करना सर्वश्रेष्ठ विकल्प है। शिवशिष्य शिवगुरु से अपने सवालों के उत्तर प्राप्त कर सकते हैं। उनसे बात कर सकते हैं। अपनी कामनाएँ पूरी करा सकते हैं। समस्याओं का हल पा सकते हैं। मदद के लिए शिवगुरु से देवदूतों की माँग कर सकते हैं। शिवगुरु अपने शिष्यों को कभी निराश नहीं करते। इस पुस्तक में विद्वान् लेखक ने इन सब का विधान दिया है, जिन्हें अपनाकर कोई भी शिव को गुरु स्वरूप धारण कर सकता है। उन्हें अपने जीवन में शामिल कर सकता है। उनसे अपनी बातें मनवा सकता है। उनको साक्षी बनाकर सिद्धियाँ अर्जित कर सकता है। जीवन के भोगों का सुख उठाते हुए मोक्ष की राह आसान कर सकता है। इसे गृहस्थ, गृहस्थ जीवन के संत और आध्यात्मिक संत सभी सामान रूप से अपना सकते हैं। जिन्होंने किसी अन्य को गुरु धारण किया है, वे भी शिव को गुरु धारण कर सकते हैं। सबका जीवन सुखी हो, यही हमारी कामना है।
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Genres
Religion & Spirituality
Tags
Religion
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
PRABHAT PRAKASHAN PVT Limited
Month-Year
Jan, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789353221447
ISBN-10: 9353221447
Language
Hindi
No. of Pages
152
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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