Salam Azad
Description
शर्मनाक बांग्लादेश के आठवें संसदीय चुनाव के दौरान और उसके तुरंत बाद वहाँ के हिंदू समुदाय पर अत्याचार- उत्पीड़न का जो दौर चला, सलाम आजाद की यह औपन्यासि
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क कृति उसी का दस्तावेज है। बांग्लादेश बनने के बाद वहाँ के हिंदू कई बार अत्याचार के शिकार हुए हैं लेकिन इस बार सुनियोजित ढंग से उन पर अत्याचार-उत्पीड़न का जो चक्र चला, उसके आगे पिछली घटनाएँ नगण्य हैं। बांग्लादेश से हिंदुओं को नेस्तनाबूद कर वहाँ उग्र इस्लामी तथा तालिबानी राजसत्ता कायम करने के मकसद से इस्लामी कट्टरपंथियों की मदद से बने चारदलीय गठबंधन की छत्रछाया में हिंदू नागरिकों पर चौतरफा अत्याचार किया गया। पिता के सामने बेटी के साथ और माँ-बेटी को पास-पास रखकर बलात्कार किया गया। बलात्कारियों की पाशविकता से सात साल की बच्ची से लेकर साठ साल की वृद्धा तक को रिहाई नहीं मिली। लेकिन क्यों और कहाँ से आई यह बर्बरता ? एक समुदाय के खिलाफ क्यों चला यह अत्याचार का दौर ? - इसी का जवाब ढूँढ़ा गया है इस उपन्यास में।
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Reading Moods
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Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 2003
ISBN
ISBN-13: 9788126706259
ISBN-10: 8126706252
Language
Hindi
No. of Pages
98
Format
Paperback
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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