Rajendra Yadav
Description
शह और मात शह और मात दूसरे प्यार की जटिल और कटु कहानी है, जहाँ अपराध-भावना से पीड़ित प्रत्येक पात्र अपना पुनरान्वेषण करता है और अंत में अपने को एक यंत्
...
रणादायक भ्रांति और छलना से घिरा पाता है। उपन्यास की भाषा अपनी ताजश्गी, अभिव्यंजना और शक्ति के लिए बार-बार प्रशंसित हुई है। इस उपन्यास को पढ़ना एक अद्भुत - लेकिन बेहद आत्मीय - अनुभव से गुशरना है, जो अपने को देखने की नई दृष्टि देता है। शह और मात...एक शुद्ध मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, इसमें दो व्यक्तियों के प्रति तीसरे व्यक्तित्व (यानी सुजाता) की प्रतिक्रियाओं का वर्णन है। अचरज की बात यह है कि देशकाल की स्थितियों से प्रायः कोई मदद न लेते हुए भी लेखक इस उपन्यास को इतना नाटकीय और सजीव बना देता है ! सुजाता की उदय से सम्बद्ध दिलचस्पी क्रमशः अधिक तीखी और गहरी होती जाती है। यह दिलचस्पी बहुत कुछ बौद्धिक क़िस्म की है, उपन्यास की नाटकीयता भी एक खास तरह का बौद्धिक मनोवैज्ञानिक विनोद करती है। उपन्यास की नाटकीयता और रोचकता का एकमात्र रहस्य उसकी मनोवैज्ञानिक सूक्ष्मता एवं यथार्थ अनुकारिता है। उपन्यास का प्रत्येक पन्ना रोचक है।
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Genres
No genres specified
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Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
RADHAKRISHNA PRAKASHAN PVT. LT
Month-Year
Apr, 2015
ISBN
ISBN-13: 9788183616812
ISBN-10: 818361681X
Language
Hindi
No. of Pages
Not specified
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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