संपादक सागर यादव जख़्मी
Description
वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जी के शब्दों में
"कविता से मनुष्य-भाव की रक्षा होती है। सृष्टि के पदार्थ या व्यापार-विशेष को कविता इस तरह व
...
्यक्त करती है,
मानो वे पदार्थ या व्यापार-विशेष नेत्रों के सामने नाचने लगते हैं। वे मूर्तिमान दिखाई देने लगते हैं।
उनकी उत्तमता या अनुत् से बहने लगते हैं। तात्पर्य यह है कि कविता मनोवेगों को उत्तेजित करने का एक उत्तम साधन है।
यदि क्रोध, करुणा, दया, प्रेम आदि मनोभाव मनुष्य के अन्तःकरण से निकल जाएँ, तो वह कुछ भी नहीं कर सकता।
कविता हमारे मनोभावों को उच्छ्वासित करके हमारे जीवन में एक नया जीव डाल देती है।
हम सृष्टि के सौन्दर्य को देखकर मोहित होने लगते हैं। कोई अनुचित या निष्ठुर काम हमें असह्य होने लगता है।
हमें जान पड़ता है कि हमारा जीवन कई गुना अधिक होकर समस्त संसार में व्याप्त हो गया है।
"सीप में मोती' साझा काव्य संग्रह में भारत के प्रतिभाशाली 37 रचनाकार सम्मिलित हैं।
सभी रचनाकारों की रचनाएँ एक से बढ़कर एक हैं।इस संग्रह में रचनाकारों ने जीवन, समाज, प्रकृति ,भक्ति, प्रेम, इत्यादि विषय पर अपनी लेखनी चलाई है। हमें आशा नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि इंक़लाब ऑनलाइन पत्रिका/ईबुक प्रकाशन का यह साझा काव्य संग्रह आपको अवश्य पसंद आएगा। हमेशा की तरह इस बार भी आपका प्यार मिलेगा।
सादर,
सागर यादव 'जख़्मी'( संपादक)
आराध्या 'अरु' (सहायक संपादक)
Read more