Sunita Singh
Description
समऩणप बाव सबी इस तप्त ह्रदम के, दृग-िर से ससचॊित ककसरम के, हे देव! सभर्ऩित तुभको हैं, शूर ऩयािम,ऩुष्ऩ र्विम के।।
आभार हय िर-कण का िीवन-सरयता भें,
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तनि अनुबव क्िन ऩय आधारयत है। उभॊग, तयॊग मा व्मथा-कथा भें, आबाय सफका रृदम से तनत है।।
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