आचार्य चतुरसेन, Acharya Chatursen
Description
ऐतिहासिक, सामाजिक प्रेम व भावनाओं में डूबी कहानियों का अनूठा संग्रह ऐतिहासिक उपन्यासों के कुशल चितेरे आचार्य चतुरसेन ने 4 दशकों तक लगातार उपन्यास और क
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हानियों के साथ - साथ विविध विषयों की ढेरों किताबें लिखीं। उनकी कहानियांें की संख्या लगभग 450 रही। इनमें से अनेक कहानियां क्लासिक का दर्जा रखती हैं। इनकी सम्पूर्ण कहानियों को पांच भागों में प्रकाशित करने के सिलसिले की यह चैथी कड़ी है। शैली की दृष्टि से आचार्य जी सिद्धहस्त कथाकार रहे। उनकी कहानियां विविध विषयों में फैली हुई हैं। ‘सोया हुआ शहर’ में यह विभाजन इस प्रकार है -
सोया हुआ शहर, ताज मुगलकालीन।
दे ख़ुदा की राह पर, कमल किशोर, सुखदान सामाजिक।
शर्मा जी, पंडित छोटेलाल, चैधरी संस्मरणात्मक।
जापानी दासी, तिकड़म, चिट्ठी की दोस्ती कौतुक प्रधान।
राजा साहब के प्राइवेट सेक्रेटरी, राजा साहब की कुतिया, राजा साहब की पतलून सामंतकालीन।
चैथी भांवर, घोड़ी का मोल - तोल, राज्यों की चैसर वीरता प्रधान।
हैदरअली, विश्वासघात, दिल्ली दरबार में शिवाजी राजे ऐतिहासिक।
कैदी, दियासलाई की डिबिया, अब्बाजान, मनुष्य का मोल भावप्रधान।
जीजाजी, प्लेंचेट, दण्ड, सविता, रोगी - परीक्षा समस्याप्रधान।
बहन तुम कहां, मैं तुम्हारी आंखों को नहीं, तुम्हें चाहता हूं पारिवारिक।
निश्चय ही यह सीरीज़ कहानी के पाठकों, शोधा£थयों, अध्येताओं और आलोचकों के लिए उपयोगी होगी।
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