Rajendra Yadav
Description
सारा आकाश आजशद भारत की युवा-पीढ़ी के वर्तमान की त्रासदी और भविष्य का नक़्शा। आश्वासन तो यह है कि सम्पूर्ण दुनिया और सारा आकाश तुम्हारे सामने खुला है -
...
सिर्फष् तुम्हारे भीतर इसे जीतने और नापने का संकल्प हो - हाथ-पैरों में शक्ति हो... मगर असलियत यह है कि हर पाँव में बेड़ियाँ हैं और हर दरवाजश बंद है। युवा बेचैनी को दिखाई नहीं देता कि किधर जाए और क्या करे। इसी में टूटता है उसका तन, मन और भविष्य का सपना। फिर वह क्या करे - पलायन, आत्महत्या या आत्मसमर्पण ? आजशदी के पचास बरसों ने भी इस नक्शे को बदला नहीं - इस अर्थ में सारा आकाश ऐतिहासिक उपन्यास भी है और समकालीन भी। बेहद पठनीय और हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासों में से एक सारा आकाश चालीस संस्करणों में आठ लाख प्रतियों से ऊपर छप चुका है, लगभग सारी भारतीय और प्रमुख विदेशी भाषाओं में अनूदित है। बासु चटर्जी द्वारा बनी फ़िल्म सारा आकाश (हिन्दी) सार्थक कलाफिल्मों की प्रारम्भकर्ता फ़िल्म है।
Read more
Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Radhakrishna Prakashan
Month-Year
Jan, 2008
ISBN
ISBN-13: 9788183612531
ISBN-10: 8183612539
Language
Hindi
No. of Pages
207
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?