Virendranath Mandal
Description
भारत की राष्ट्रभाषा होने के बावजूद जनसाधारण के हिन्दी संबंधी ज्ञान को पर्याप्त नहीं कहा जा सकता । शैक्षिक जीवन में पाठ्य–पुस्तकों आदि के संदर्भ में भी
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हिन्दी के शब्दार्थ, शब्द और वाक्य–प्रयोग आदि को लेकर विद्यार्थियों को सदैव समस्याओं का सामना करना पड़ता है । इसी के मद्देनजर इस कोश में विद्वान कोशकार का बल विस्तार की बजाय भाषा की व्यावहारिक उपयोगिता पर रहा है । पाठ्यक्रम तथा रोजमर्रा जीवन, मीडिया मा/यमों आदि में प्रयुक्त होने वाले आवश्यक शब्दों, उनके अर्थों, उनकी व्याकरणगत स्थिति तथा प्रयोगों से सम्पन्न यह कोश विद्यार्थियों, साहित्यप्रेमियों, अनुवादकों, भाषाकर्मियों व भाषा–अधिकारियों के लिए समान रूप से उपयोगी है । इसके अलावा इसमें रामायण, महाभारत, बुद्धचरित, प्रमुख पर्वतमालाओं, नदियों, पशु–पक्षियों तथा देवी–देवताओं से सम्बन्/िात शब्दावलियों को अलग से सँजोया गया है ।
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