कवि रामशरण सेठ
Description
कविता में रूपांतरण की कथा कहते हुए मेरा मानना है कि कविता का क्षेत्र कवि की जागीर होती है। जिसका विस्तार करते चलना उसका धर्म । कवि अपने वैचारिक विस्ता
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र के संघर्ष में तमाम पड़ावों से गुजरते हुए अपनी चेतना और अपने हृदय का भी विस्तार करता चलता है। इस विस्तार से उसमें आती है एक दृष्ट ।और एक दृष्टि संपन्नता भी । जिससे वह यथार्थ को पकड़ने में समर्थ होता है और अग्रसर भी व तीव्रतम अनुभूति पूर्णता में अभिव्यक्त करने की क्षमता भी प्राप्त कर लेता है । वहीं से वह रूप और वस्तु का नव विधान करता है। जो उस कवि को अन्य कवियों से अलग पहचान देता है और वह मार्गदर्शक की भूमिका में आ जाता है।
हमारे हिंदी साहित्य में अन्य भाषा के साहित्यों की ही तरह इसकी एक विशाल परंपरा है ।संस्कृत के कवियों की यथार्थ चेतना का हिंदी में भी विस्तार हुआ। लोकमंगल को मानदंड बनाया गया ।जिस पर चलकर साहित्य बनता है ।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सूर तुलसी कबीर से पहले संस्कृत और हिंदी के कवियों का नाम गिनाते हुए उनमें लोकमंगल की भावना देखा ।जिसे हमने आधुनिक हिंदी साहित्य में भारतेंदु महावीर प्रसाद द्विवेदी प्रेमचंद निराला मुक्तिबोध नागार्जुन त्रिलोचन केदार द्वय गोरख पांडे आदि के रूप में चिन्हित किया ।
अब इस क्षेत्र में सैकड़ों कवि गतिशील हैं और अपनी विरासत का झंडा बुलंद किए हुए हैं ।और प्रतिक्रियावादियों से पंगा लेते हुए अभिव्यक्ति के खतरे उठा रहे हैं।
और कह भी रहे हैं कि अभी भी लोकतंत्र जिंदा है ।संविधान जिंदा है। चीख चीखकर चिल्लाते हुए वे यातना के अंतिम शिखर पर भी अपनी जमीर को बचाए हुए हैं ।वे सत्य के सिपाही हैं ।लोकप्रिय हिंदी कवि एवं लेखक रामशरण सेठ आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।वे अपनी कविता के प्रति बिल्कुल ईमानदार हैं। सरल , एवं कम शब्दों में अधिक बात कहना इनकी कविता की पहचान है । इन्होंने लगभग हर विषम विषय पर अपनी लेखनी चलाई है। इनकी रचनाओं में संवेदना , समय, वर्तमान, भूतकाल ,भविष्य , देशप्रेम, राजनीति, सामाजिक कुरीति, अध्यात्म, रोग, प्रकृति,गुरु-शिष्य प्रेम इत्यादि का चित्रण देखने को मिलता है। प्रिय साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी मित्रों इंकलाब प्रकाशन द्वारा प्रकाशित एवं प्रसारित ' समय के रंग' कविता संग्रह आपको अवश्य पसंद आएगा। हमें आशा नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि हमेशा की तरह इस बार भी हमें आपका प्यार मिलेगा।
- हौसिला अन्वेषी
वरिष्ठ साहित्यकार ,
प्रधानाचार्य , हिंदी विभाग
मुंबई विश्वविद्यालय
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