Yogesh Yadav
Description
‘‘सच के सामीप्य’’ कहानी संग्रह, समाज से प्रकट ‘‘दृष्य’’ का वर्णन है । इसे ‘‘सच’’ इसलिए कहा है कि कहीं न कहीं मेरा कहानी या पात्रांे से साक्षात्कार है
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। ‘‘सच’’ में
अंाशिक काल्पनिकता, कहानी को अलंकारिक गहनों में जड़ देती है, काल्पनिक दृश्य से ही यथार्थ के परिवेष को बुना जाता है । कथा, संवाद और सच को सन्तुलित किए जाने की मेरे तई भरपुर कोशिश है । कहानी सरल और संवेदनशील अनुभूति से प्रवाह में रहें, यह प्रयास किया है मैंने। हृदय से आभार है मेरे अनुजद्वय डाॅं. सत्येन्द्र यादव एवं श्री नीरज यादव का । कलेवर के संयोजन के लिए प्रिय श्री सुभाष देषमुख एवं केलीग्राफी के लिए सत्यम सम्राट आचार्य के प्रति कृतज्ञ हॅू । मेरी अर्धांगिनी डाॅ. कुसुम यादव ने मेरे लेखन की सामान्य इच्छा को ‘‘दृढ़ इच्छा शक्ति’’ में परिवर्तित किया। ‘‘संकल्प प्रकाषन’’ के सदस्यों का पारिवारिक स्नेह और सहयोग सदैव मेरे अन्तस में अंकित रहेगा ।
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