Indrasingh Arsela
Description
‘सच कहूँ क्या और’ ग़ज़ल संग्रह वास्तव में ही एक सच बयानी का सजीव दस्तावेज़ है। लेखक के ग़ज़ल लेखन के प्रारंभिक दौर में इनकी ग़ज़लें अंकुरित होकर ज़मीन
...
ी हक़ीक़त बयाँ करती नज़र आती हैं और जीवन के उतार-चढ़ाव का हर रूप ग़ज़लों में दृष्टिगोचर होता है। इस संग्रह में एक तरफ़ अकेलेपन की पीड़ा है तो दूसरी ओर ग़रीबी है, लाचारी है, बेरोज़गारी है, भ्रष्टाचार है, भुखमरी है कई सामाजिक विसंगतियों के साथ आम आदमी का पक्ष इनकी ग़ज़लें अपने आप मं समेटे हुए हैं।
Read more