Sudha Kumari
Description
परमात्मा के दरबार में खचाखच भीड़ थी। कई जीवों की प्रोन्नति परजीवी की श्रेणी में हुई थी। कायाकल्प के आदेश के कारण उन्हें पुनर्जन्म लेना था, किंतु किसी क
...
ो उस प्राणी का हुलिया पसंद नहीं था, कोई देश-काल के समायोजन से क्षुब्ध था। किसी को अन्य जीवों की तुलना में अपना स्थान तुच्छ दिख रहा था। इन सभी क्षुब्ध जीवात्माओं ने परलोक पर हल्ला बोल दिया था, जो अब थोड़ा उग्र एवं आक्रामक हो रहा था। पर वे डाल-डाल तो परमात्मा पात-पात। पुनर्जन्म और स्थानांतरण का आदेश निकालते ही वे कहीं उड़न-छू हो गए थे। अब चार दिनों से पीड़ित, संतप्त आत्माएँ द्वार के पास ताँता लगाए हुए थीं। यों तो प्रतिवर्ष कुछ आत्माएँ ऐसे आदेश से पीड़ित होकर आती थीं, किंतु इस बार तो जीवों की हाय-दैया से परलोक में भूकंप आ गया था।
जीव बेचैनी से इधर-उधर देख रहा था—परमात्मा की सीट अभी भी खाली थी। जीव सुबह की फ्लाइट से सीधा परलोक आ रहा था। फ्लाइट का सिक्योरिटी टैग यमदूतों ने अबतक उसके मरियल से गले में टाँग रखा था। जीव ने अपना टैग लगा बैग उठाया और परमात्मा के निजी सचिव की टेबल पर रखा। सचिव ने भौंहें ऊपर कीं, मुसकान आधे इंच तक सीमित रखी और चुप रहा।
“अच्छा, परमात्मा के दर्शन कब तक होंगे?” जीव ने बेचैनी से पूछा। वह पहली बार धरती से परलोक आया था। इससे पहले तो ईश्वर के भेजे दूतों से धरती पर ही निपट लिया करता था।
“वे तो कल उपरिलोक में ‘विशेष परमात्मा सेल’ के उद्घाटन के लिए गए हुए हैं। पुष्पक विमान से मध्याह्न तक लौटेंगे। आगे की मैं नहीं बता सकता।”
“और पुनर्जन्म याचिकाओं पर कब विचार होगा? लोकल पुनर्जन्म कमेटी (एल.पी.सी.) की बैठक कब होगी?”
Read more