Dr. Phoolkali 'Poonam'
Description
मुझ अकिंचन के दो ग़ज़ल-संग्रह ‘बोलती रोशनाई’ और ‘आईने में चाँद’ को आप सम्मानित पाठकगणों द्वारा अत्यधिक सराहा गया और भरपूर समीक्षायें लिखी गईं जो मेरे लि
...
ये किसी पुरस्कार से कम नहीं हैं... अभिभूत हूँ। आपके इसी प्यार दुलार से मेरे अल़्फ़ाज़ उड़ान भरते रहे, चाँद-सितारों से होते हुये वो दूसरे अदृश्य जहाँ को देखने की कोशिश में हर क्षण तसव्वुर के दर पर सजदा करते रहे। आख़िर में हमारी ख़ामोशी की इबादत रंग लायी और हमें ऐसे अनदेखे दृश्य दिखाई पड़ने लगे जो पहले कभी कल्पना में नहीं थे; अब वह पूरी कायनात ज़रा-ज़रा मेरे सामने आती जा रही है। इन्द्रधुनष के सात रंगों में मैं पहले ही डूबी थी, अब तो अनगिनत रंग वादियों में बिखरे पड़े हैं... जिधर निगाह जाती है उधर ही बँध जाती हूँ। इस संग्रह को भी अपनी मुहब्बत से शराबोर करके अपनी पलकों का स्पर्श दीजिए, मैं विनयावनत रहूँगी।
Read more