दीपक यादव 'बाड़ीगर'
Description
दर्शना… बिहार के एक गरीब, पिछड़े गाँव की बेटी— स्वाभिमान जिसकी सबसे बड़ी पूँजी है। उसकी शादी तय होती है राजस्थान में। यह दूरी सिर्फ़ रास्तों की नहीं, सं
...
स्कृतियों और भावनाओं की भी है। जहाँ आम शादियाँ दिलों के मेल से बनती हैं, वहाँ दर्शना का रिश्ता पैसों की बोली पर तय होता है। पति, जो ब्याह के लिए दर-दर भटक चुका है, अंत में रकम देकर उसे हासिल करता है। दर्शना खुश नहीं है। भीतर विद्रोह सुलगता है, पर शब्द नहीं। वह अपनी किस्मत मानकर चुपचाप होनी स्वीकार कर लेती है। मगर यह कहानी सिर्फ़ एक लड़की की उदासी नहीं—यह उस समाज की परतें उधेड़ती है, जहाँ सरकारी नौकरी वाला दामाद “इज़्ज़त” का तमगा बन चुका है, रिश्ते योग्यता से नहीं, वेतन की पर्ची और रुतबे से तौले जाते हैं। कहानी में भाई का भाई के लिए प्रेम, त्याग और संघर्ष भी है।
Read more