Shri Girijesh Kumar , Shivendra Kumar Singh
Description
<b>किस्से-कहानियाँ किसे पसंद नहीं। और वो भी ऐसे किस्से; जिन्हें सुनते हुए कोई मीठा सा गीत पार्श्व संगीत बनकर बजने लगे; आँखों के सामने कुछ चहेते चेहरे
...
अनायास तैरने लगें। ऐसे किस्से; जिन्हें पढ़ते हुए आप पहुँच जाएँ किसी सिद्ध संगीतज्ञ के म्यूजिक रूम में। वह म्यूजिक रूम; जहाँ आनेवाले कल का कोई सदाबहार नगमा आकार ले रहा है; जहाँ गीत-संगीत के रचनाकारों के बीच सुरीला संवाद हो रहा है; जहाँ साज और आवाज की सोज भरी जुगलबंदी हो रही है। अकसर देखा गया है कि शास्त्रीय रागों की बात भी बड़े शास्त्रीय तरीके से की जाती है; लेकिन ‘रागगीरी’ का अंदाज बिल्कुल अलग है। यहाँ किस्सा भले ही शुरू होता है किसी राग के बहाने; लेकिन पढ़नेवाला पहुँच जाता है किसी जाने-पहचाने गीत की गंगोत्तरी पर।</b>
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Genres
History
Tags
Juvenile Nonfiction
Music
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789353225070
ISBN-10: 9353225078
Language
Hindi
No. of Pages
224
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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