Suman
Description
‘पिंजर प्रेम प्रकासिया, अंतरि भया उजास’ कहते हुए कबीर अपने अंतः में प्रेम के उजास का प्रसार देखते हैं और कंठ में कस्तूरी की सुवास से मदमाते प्रेम का अ
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लख जगाते फिरते हैं। कबीर ही क्यों जाने कितने ही संतों, सूफ़ियों, कवियों और अनुरागियों के अंतःकरण में प्रेम की कस्तूरी महमह करती हुई काल को अमरत्व प्रदान करती इतिहास के अनगिन पृष्ठों पर सुवासित है। हम अपनी इच्छा और आवश्यकता भर इन पृष्ठों से प्रेम की परिभाषाएँ, प्रेम की पंक्तियाँ उठा ले आते हैं। हमारे गौरव ग्रन्थ प्रेम के अगणित आख्यानों से भरे-पूरे हैं। छोह-बिछोह की, सर्वस्व समर्पण की, त्याग की जाने कितने गीत, कितनी कहानियाँ और कितनी कविताएँ हमें मोहती हैं। ले आती हैं इस रहस्यमय ‘ढाई आखर’ के पास जिसको परिभाषित करने के प्रयास में सदियाँ बीत गईं लेकिन वह अपरिभाषित ही रह गया।जिस-जिस के मानस से गुजरा एक नई परिभाषा बन गुजरा। सबने अपने हिस्से इसे अलग, अनोखा और अकथ ही पाया।किसी के हिस्से सौम्य-शालीन बन आया तो किसी के चंचल-मुखर। किसी को इसने जीवन दिया तो किसी को मरण।
प्रेम ने ही सम्भव बनाया है हर सृजन। आलोकित किया है मन का तिमिरांचल और रचा है पृथ्वी के वक्ष पर मनुष्यता का अपराजेय, स्वर्णिम इतिहास और यक़ीनन आगे भी प्रेम की ही भूमिका हमारे जीवन को सुंदर और मानवीय बनाने में महती रहेगी। प्रेम ही हमारे पिंजर को प्रकाशित करता रहे यही तो काम्य है सबका। प्रेम का प्रसार जितना हो उतना कम है। दुनिया को जीने के लिए, जीने लायक बचाए रखने के लिए जरूरी है कि प्रेम संचित हो; मन में,जन में,विजन में, हर कहीं, कण-कण में ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए अकाल न पड़े।वे भौतिकता के मारे यंत्रवत न रहें।
बिछोह में बची रहे छोह की तरल आकांक्षा।इसी कामना से प्रेरित हो यह प्रेम कविताओं का संचयन आपके सम्मुख है। जिसमें पीढ़ियों की भाव यात्राएँ सहेज ली गईं हैं।इन प्रेम कविताओं में रचनाकारों का जीवन साक्षात हैं। स्वयं को मूल में, ईमानदारी से अभिव्यक्त करती ये कविताएँ जाने आपको कितना क्षुब्ध या लुब्ध करें। इनका लालित्य आपको सम्मोहित करेगा या विमोहित, नहीं जानती। लेकिन इतना जरूर जानती हूँ कि आप इन कविताओं में समय और समाज का परिवर्तन, छल-छद्म और विचलन सहज ही देख पाएँगे। अधिक मानवीय, अधिक आत्मीय व अधिक ईमानदार मानुष-अभिव्यक्ति भी इन्हीं प्रेम कविताओं में आपको मिलेगी।
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