Umashankar Singh Parmar
Description
'प्रतिपक्ष का पक्ष' उमाशंकर सिंह परमार के आलोचनात्मक आलेखों का संग्रह है। इस पुस्तक में विभिन्न पुस्तकों पर आलोचनात्मक टिपण्णी के साथ लोक पर महत्वपूर
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्ण सामग्री संकलित है। पुस्तक की भूमिका में उमाशंकर सिंह परमार कहते हैं- "प्रतिपक्ष केवल जवाबदेही नहीं है बल्कि निरन्तर प्रयत्नशील और प्रयोगशील रहने की रचनात्मक प्रक्रिया है। प्रतिपक्ष का अपना पक्ष है जैसे कि पक्ष का अपना पक्ष होता है। प्रतिपक्ष का पक्ष लोक है जिसकी पक्षधरता सचेतन आन्दोलन होते रहने का बोध कराती है। यह आन्दोलन उस पक्ष के विरुद्ध सक्रिय होता है जिसका हम प्रतिपक्ष लेकर उपस्थित हैं। प्रतिपक्ष एक प्रेरणा है, एक कवि/ लेखक की रचना प्रक्रिया का मूल हेतु है; सामाजिक, राजनैतिक, न्याय व समता के लिए कठोर जीवन संघर्षों में झुलस रही बहुसंख्यक समुदायों के लिए जीवन आकांक्षाओं का एक जटिल प्रश्न है, वर्गीय विभेदों की बढ़ती खाईं के कारण व्याप्त भयानक विघटन और मानवीय संकटों का मानवतापूर्ण प्रतिरोध है। भूमंडलीकरण के इस दौर में प्रतिरोध आज की मानवीय जरुरत है।"
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