Parveen Shakir
Description
पाकिस्तान की नयी उर्दू शायरी में परवीन शाकिर की गणना प्रेम की नाजुक मूर्ति के रूप में होती हैं परवीन का प्रेम अपने अद्वितीय अंदाज में ‘नर्म सुखन’ बनकर
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फूटा है और अपनी ‘खुशबू’ से उसने उर्दू शायरी की दुनिया को सराबोर कर दिया है। पाकिस्तान की ही प्रसिद्ध कवयित्राी फहमीदा रियाज के अनुसार, ‘परवीन के शे’रों में लोकगीतों की सी सादगी और लय भी है और क्लासिकी मौसीकी (शास्त्राीय संगीत) की नफ़ासत और नज़ाकत भी। उसकी नज्में और ग़ज़लें भोलेपन और सॉफिस्टिकेशन का दिलआवेज़ संगम हैं।’ परवीर शाकिर की शायरी का केन्द्रीय विषय ‘स्त्राी’ है। प्रेम में टूटी हुई, बिखरी हुई-खुद्दार स्त्राी। लेकिन उसकी शायरी की यह कोई सीमा नहीं है। वस्तुतः परवीन की शायरी प्रेम की एक ऐसी लोरी है जो अपने मद्धिम-मद्धिम सुरों से सोते हुओं को जगाने का काम करती है। परवीन की शायरी में रूमानियत भी है और गहरी ऐंद्रिकता भी, पर कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि सामने की दुनिया सिर्फ एक सपना है। अपनी सूक्ष्म यथार्थपरकता के कारण ही मुख्य रूप से ‘स्त्राी’ और ‘प्रेम’ को आधार बनाकर लिखी गई ये कविताएँ अनुभूति के व्यापक द्वार खोलती हैं।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Sep, 2006
ISBN
ISBN-13: 9788126707669
ISBN-10: 8126707666
Language
Hindi
No. of Pages
142
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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