D.D. Ojha
Description
प्लास्टिक विश्व भर में सर्वाधिक प्रयोग में आने वाला पदार्थ हो चुका है। हलका, टिकाऊ, जंग रहित और किसी भी आकृति में ढाले जा सकने के कारण प्लास्टिक की लो
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कप्रियता इतनी बढ़ गई है कि आज के युग को प्लास्टिक युग कहने में अतिश्योक्ति नहीं होगी। इसने लकड़ी एवं लौह को प्रतिस्थापित कर अपना स्थान बना लिया है, जिसके फलस्वरूप घरेलू उपयोग की वस्तुएँ, पैकेजिंग, चिकित्सा, यांत्रिक उपकरण, कृषि, जहाजरानी, दूरसंचार और यहाँ तक कि अंतरिक्ष यानों में भी प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा हैप्लास्टिक के अनेकानेक उपयोग होने के बावजूद इसके खतरे भी कम नहीं है। प्लास्टिक अजैव निम्नीकृत होने के कारण इसको नष्ट नहीं किया जा सकता है जिसके कारण मानव एवं मवेशी के स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा जल स्रोतों के लिए यह अभिशाप बन चुका है। आज प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीर समस्या है। अतः इसका ज्ञान सभी देशवासियों को होना नितान्त आवश्यक है। इसी उद्देश्य को दृष्टिगत रखते हुए हमने प्लास्टिक के सत्य को उजागर करते हुए “प्लास्टिक का सत्य” पुस्तक का प्रणयन किया है।
इस जनोपयोगी पुस्तक में प्लास्टिक का ऐतिहासिक परिदृश्य, वर्गीकरण, विविध उपयोग, उत्पादन विधियाँ, प्लास्टिक के दुष्प्रभाव, जैव अपघटनीय या बायो प्लास्टिक, प्लास्टिक पुनर्चक्रण, अधिनियम एवं प्लास्टिक कचरे का सदुपयोग आदि महत्वपूर्ण विषयों पर सरल एवं बोधगम्य हिन्दी भाषा में अनेक श्वेत-श्याम एवं रंगीन चित्रों के माध्यम से जानकारी प्रदान करवाने का सुप्रयास किया गया है। आशा है सुधी पाठक इससे लाभान्वित होंगे।।
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