संपादक प्रदीप कुमार बाजिया "दीप"
Description
आज बेटी को बचाया तो कल वह बहन बनेगी, फिर किसी की पत्नी बनेगी और एक दिन किसी की मां बनेगी l माँ ही जीवन का आधार स्तंभ है और माँ ही प्रथम गुरु तथा मार्ग
...
दर्शक होती है l
सबको नया संसार दिखाएं
जिंदगी दूसरों के लिए जीना सिखाए
जीवन के लक्ष्यों का अहसास कराए
ऐसी देवी मां कहलाए ll
8 मार्च महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन महिलाओं को केवल एक दिन ही याद किया जाए वो कोई साधारण नहीं है, वो शक्ति है सृष्टि है | नारी सशक्तिकरण का मतलब महिलाओं का शक्तिशाली बनना है जिससे वह अपने जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकें और परिवार व समाज में सही तरीके से रह सके l यहां पर महिला के वास्तविक अधिकारों को प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाना ही महिला सशक्तिकरण है l भारत जैसे देश में महिला सशक्तिकरण की बहुत अधिक आवश्यकता है, क्योंकि महिलाओं को अनेक प्रकार की हिंसा व यातनाओं का सामना प्राचीन काल में करना पड़ता था ऐसा कई अन्य देशों में भी देखने को मिलता था लेकिन हमारे देश की संस्कृति में महिलाओं को सम्मान देने के लिए मां, पत्नी, बहन व पुत्री के रूप में पूजा जाता है लेकिन पूजने मात्र से नहीं बल्कि अब महिलाओं को हर क्षेत्र में शक्तिशाली बनाना पड़ेगा तथा देश की आधी आबादी होने के कारण देश की अर्थव्यवस्था और विकास में भी इन को आगे आने की आवश्यकता है। आज के समाज में लैंगिक आधार पर काफी भेदभाव देखने को मिलते हैं बहुत से क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के लिए घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होती है। महिलाओं में अशिक्षा और बीच में पढ़ाई छोड़ने जैसी समस्याएं भी महिला सशक्तिकरण में बाधा उत्पन्न करती हैं। कन्या भ्रूण हत्या भी अपने देश में महिला सशक्तिकरण की राह में एक बड़ी बाधा है, लेकिन इन सबसे ऊपर उठकर तथा इन समस्याओं का समाधान करते हुए हमें महिलाओं को बहुत ही सशक्त और शक्तिशाली बनाना है हमारे ग्रंथों में नारी को पूजनीय और देवी समान माना गया है जहां पर नारी जाति को प्रतिष्ठा और सम्मान मिलता है वहीं पर देवता निवास करते हैं
यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता
वर्तमान में महिलाओं को राजनीतिक सामाजिक, आर्थिक, शारीरिक, मानसिक क्षेत्र में परिवार, समुदाय एवं राष्ट्र की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान करने की बहुत ही अधिक आवश्यकता है l महिलाओं को शक्तिशाली बनाते हुए आगे बढ़ाने की जरूरत है, नारी शक्ति को प्रोत्साहित करने और सामाजिक जागरूकता के लिए अनकहे अल्फाज़ साहित्यिक संस्थान , किशनगढ़-रेनवाल, जयपुर ( राजस्थान) इस महिला दिवस पर लेकर आ रहा प्रतिष्ठित और नवांकुर रचनाकारों की उत्साहवर्धक रचनाओं की *ई-बुक* , जिसमें महिला शक्ति, उन पर होने वाले अत्याचार, उनके द्वारा किए गए कार्य, प्राप्त उपलब्धियां आदि को शब्दों रूपी कविता में पिरोकर महिला सशक्तिकरण के लिए यह छोटा सा मेरा प्रयास किया गया है|
प्रदीप कुमार बाजिया "दीप"
सम्पादक : प्रतिभा
अध्यापक
कोषाध्यक्ष : अनकहे अल्फाज़ साहित्यिक संस्थान
किशनगढ़-रेनवाल , जयपुर (राज.)
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