चित्रा विशाल श्रीवास्तव
Description
प्रेम सनातन है अतः वह परिवर्तन नहीं मॉंगता। प्रेम सदैव नया सा रहता है, अतः जिसके प्रति जग गया तो बस उसमें ही तृप्ति मिलती है, अन्य कितने भी अनमोल या स
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ुंदर की प्राप्ति हो जाय वह उनके प्रति आकर्षित नहीं होता, वह तृप्ति केवल एक से ही प्राप्त कर पाता है चाहे प्रेमास्पद कैसा भी हो, परंतु वासना कभी तृप्त नहीं होती अतः बार-बार नये की खोज में लगी रहती है और उसकी खोज पर कभी भी विराम नहीं लगता बल्कि अतृप्ति ज्यों कि त्यों ही बनी रहती है।प्रेम के लिए किए गये सभी त्याग व धारण की गई सभी पीड़ाओं के अहंकार का त्याग ही प्रेम का विशुद्ध स्वरूप है।
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