Arun Shourie
Description
पिछले बीस वर्षों में भारत में आतंकवादी हिंसा में 60 हजार से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं। उनमें बूढ़े व जवान,स्त्रियाँ व बच्चे और गरीब व निस्सहाय भ
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ी शामिल हैं; और यह सब जेहाद के नाम पर हो रहा है। ऐसी कौन सी बात है, जो अल्लाह के वफादारों को ‘हत्यारे’ के रूप में तैयार कर रही है? पाकिस्तान के ‘गैर-मजहबी’ स्कूलों व मदरसों में शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों के मन-मस्तिष्क में क्या घोला जा रहा है? पाकिस्तान में शासन कर रही संस्थाओं का इसलाम-पसंद पार्टियों और आतंकवादी संगठनों के साथ क्या संबंध है? क्या हमें पाकिस्तान के राष्ट्रीय और सामाजिक स्वरूप पर नजर डालनी चाहिए?भारत के एक बड़े हिस्से पर बँगलादेशी घुसपैठियों ने अपना डेरा जमाया हुआ है। देश की सुरक्षा पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है? हमारे पूर्वोत्तर राज्यों में आतंकवादी और इसलामिक संगठनों को कौन जोड़ रहा है? बँगलादेश में तेजी से बढ़ रही कट्टरवादिता से क्या खतरा उत्पन्न हुआ है? आतंकवाद से निपटने में हम कहाँ चूके और इससे हमने क्या-क्या सबक सीखे हैं?
ऐसे और भी अनेक गंभीर प्रश्न हैं, जिनके उत्तर वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री अरुण शौरी की यह पुस्तक देती है। इसमें पाकिस्तान व बँगलादेश का आतंकवादी चेहरा तो बेनकाब हुआ ही है, उनकी करतूतों का कच्चा चिट्ठा भी खुला है।
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Genres
History
Tags
History
Asia
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2009
ISBN
ISBN-13: 9788173155963
ISBN-10: 8173155968
Language
Hindi
No. of Pages
362
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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