Rose Kerketta
Description
रोज ने अपने कथा-संग्रह में आदिवासी जीवन को सघनता और संपूर्णता के साथ शामिल किया है। जो जिया है; उसे ही लिखा है। संग्रह में व्यापकता है; विविधता है; आध
...
ुनिकता है; और जो सबसे बड़ी बात है; वह है प्रतिरोध का राजनीतिक स्वर। इसमें हिंदी साहित्य में चल रहे स्त्री विमर्श से अलग ढंग की कहानियाँ हैं; जो पुरुष के विरोध में नहीं; व्यवस्था के विरोध में खड़ी हैं। यहाँ अलग तरह का नारीवाद है। जल; जंगल; जमीन पर हो रहे हमले के खिलाफ लड़ता हुआ नारीवाद।
—वीरभारत तलवार
ऐसे मौसम में जबकि रचनात्मकता में एक प्रकार का सुखाड़ एवं अकाल है; रोज दी ने वैसी कहानियाँ दी हैं; जो बिल्कुल ही एक नए स्वाद की कहानियाँ हैं। समाज में जो लड़ाई है; उस लड़ाई को ताकत देने के लिए यह किताब है।
—किशन कालजयी
रोज दी की प्रमुख विशेषता यह है कि वे कहानियाँ लिखती नहीं कहती हैं; यानी एक कहानीकार का पाठक के साथ जो एक संवाद हो सकता है; पाठक में जो विश्वास हो सकता है; पाठक के साथ जो साझेदारी या भागीदारी हो सकती है; वह रोज दी की कहानियों में दिखती है। उनका जो देशज स्वर है; वह सीमित भौगोलिक दायरे में नहीं सिमटता है। हिंदी में जनजातीय पात्रों को लेकर जो कहानियाँ लिखी गई हैं; ये कहानियाँ उनसे भिन्न हैं।
—रविभूषण
इस कथा-संग्रह से गुजरते हुए आदिवासी समाज की वाचिक परंपरा-किस्सागोई का आस्वाद अनायास हमारे मन-मस्तिष्क को भिगोता है। इन कहानियों में लेखिका ने शिल्प के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं किया है। कथ्य के साथ सादा-सा शिल्प सहज रूप से आया है। एक नैसर्गिक आदिवासी सादगी मौलिकता-सहजता के साथ।
—रणेंद्र
Read more
Genres
Biography & Memoir
Tags
Literary Collections
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789353223526
ISBN-10: 9353223520
Language
Hindi
No. of Pages
152
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?