Saurabh Singh
Description
स्त्रियों के विरुद्ध होने वाले अपराध समाज की विकृत मानसिकता और उसके वैचारिक पतन को दर्शाते हैं। इन अपराधों के मूल में प्राय: वे सामाजिक परिस्थितियाँ ह
...
ोती हैं, जो स्त्री-व्यक्तित्व से भीतर ही भीतर पराजित, किंतु अहम्मन्यता के दबाव में उस पराजय को स्वीकार न करने के कारण स्त्री की देह को कुचलने वाले पुरुष को जन्म देती हैं। आम आदमी का प्रेमाख्यान पढ़ते हुए लगातार अनुभव होता रहता है कि हमारा वर्तमान स्त्री विरोध का उत्सव मनाने वाली गर्हित पुरुष-सत्ता के दर्प-जाल से मुक्त नहीं हुआ है। उपन्यासकर समाज-सांस्कृतिक अंतर्विरोधों और जटिलताओं के भीतर न जाकर बड़े सपाट ढंग से पाठक को घटनाओं के सामने खड़ा करता है, इतना अधिक कि कथानक के तानेबाने की वास्तविक प्रेरक जघन्य घटना फिर-फिर आँखों में तैरने लगती है। चरित्रों की मनोदशा उपन्यास को पठनीय भी बनाए रखती है।
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Genres
Literary Fiction
True Crime
Tags
Fiction
Crime
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Invincible Publishers
Month-Year
May, 2019
ISBN
ISBN-13: 9789387328907
ISBN-10: 9387328902
Language
Hindi
No. of Pages
210
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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