Ramvilas Sharma
Description
कबीर का फक्कड़पन, तुलसी का लोक-मांगल्य और रवीन्द्र का सौन्दर्यबोध की त्रयी निराला में न केवल विलीन होती है बल्कि उनके कृतित्व और व्यक्तित्व को ऐसी ऊँचा
...
इयाँ प्रदान करती है जिसका उदाहरण हिन्दी साहित्य में विरल है। यही स्थापना है ‘निराला की साहित्य साधना’ की। डॉ. रामविलास शर्मा की तीन खंडों में उपलब्ध ऐसी कृति है जिसमें हिन्दी आलोचना के विभिन्न आयामों का उद्घाटन हुआ है। रामविलास शर्मा अरसे तक निराला के साथ रहे थे और वे उनकी रचना-प्रक्रिया तथा जीवन-शैली के तटस्थ द्रष्टा थे। उन्होंने अपना पहला निबन्ध निराला पर ही लिखा था और उनकी पहली आलोचनात्मक पुस्तक भी निराला पर केन्द्रित होकर आई, मगर इससे रामविलास शर्मा का जी नहीं भरा। अनवरत-शोध और अध्ययन के परिणामस्वरूप उनकी अविस्मरणीय कृति ‘निराला की साहित्य साधना’ हमारे सामने आई। यह कृति निराला का जीवन-चरित भी है और उनके साहित्य का मूल्यांकन भी। ‘निराला की साहित्य साधना’ में निराला के अनेक अल्पज्ञात अथवा अज्ञात तथ्यों का उद्घाटन हुआ है। निराला के व्यक्तित्व के जटिल और सूक्ष्म अन्तर्विरोधों से निःसृत कृतित्व का इस पुस्तक में मर्मस्पर्शी मूल्यांकन हुआ है जो अत्यन्त दुर्लभ तो है ही, बेमिसाल भी है।
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Genres
No genres specified
Tags
Arborist Merchandising Root
Self Service
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 2002
ISBN
ISBN-13: 9788126704354
ISBN-10: 8126704357
Language
Hindi
No. of Pages
461
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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