Mahashweta Devi
Description
नील छवि नील छवि महाश्वेता देवी का लीक से हटकर लिखा गया रोचक उपन्यास है। यह उपन्यास वस्तुतः हमारे आधुनिक नागर समाज की खोखली होती नैतिक मान्यताओं और बीभ
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त्स स्थितियों का बड़ा ही मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करता है। शहरी उच्च मध्यवर्ग और निम्न मध्यवर्ग किस प्रकार गलत महत्त्वाकांक्षाओं और विलासिता के आकर्षण में अपने को नैतिक तथा मानवीय स्तर से गिराकर उपभोक्ता संस्कृति का शिकार होता है और सब कुछ खो बैठता है, इसका यह उपन्यास गहराई में जाकर विश्लेषण करता है। ‘ड्रग्स’ और ‘ब्लू फिल्म’ किस तरह हमारे आधुनिक समाज की जड़ों को खोखला कर रहे हैं, इसका बेहद तीखा और यथार्थपरक चित्रण इस कृति में किया गया है। इसके अलावा पत्रकारिता, कला-जगत, और तथाकथित उच्चवर्गीय जीवन की विषमताओं और विडम्बनाओं को बेहद रचनात्मक रूप से इस कथा- रचना का विषय बनाया गया है। गुंडा शरीफ़जशदों और शरीफ़ गुंडों के बीच फलती-फूलती अपराध की दुनिया के साथ राजनीति और कला-जगत की मिलीभगत का यहाँ अच्छा पर्दाफ़ाश हुआ है। कथा में उत्तेजना, जिज्ञासा और आतंक का वातावरण अंतिम पृष्ठ तक व्याप्त रहता है। एक अत्यंत पठनीय, रोचक तथा विचारोत्तेजक कृति।
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