Rafi Yusufpuri
Description
इस शेरी मज्मूआ 'नवा-ए-रफ़ी' में शामिल तमाम अशआर ज़बानो-बयान और मआनी-ओ-मतालिब के ऐतबार से एक ख़ास क़ूवते-फ़िक्र-ओ-कुहना मश्की की दलील है। अपनी सीरत व शख़्सिय
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त को सँवारने और उस्तवार करने में जनाब रफ़ी यूसुफ़पुरी साहब को कैसी सब्र-आज़मा आज़माइशों से गुज़रना पड़ा है उसकी झलक आपके कलाम में साफ़ तौर पर देखने को मिलती है। जनाब रफ़ी यूसुफ़पुरी साहब के कलाम में जिद्दत के साथ-साथ क़दीम रंग भी झलकता दिखाई देता है आपकी ग़ज़लों में ज़ियादातर अशआर तसव्वुफ़ और इरफ़ाने-हक़ पर मबनी होते हैं। यह शेरी मज्मूआ 'नवा-ए-रफ़ी' मुहतरम 'रफ़ी' यूसुफ़पुरी साहब की ज़िंदगी भर की अदबी काविशों का अदबी समरा और उनके सबसे अहम तरीन ख़्वाब की एक हसीन ताबीर है जो आज हम सबके हाथों में एक किताबी शक्ल में मौजूद है। यह किताब बदक़िस्मती से उनकी हयात में किन्हीं वजूहात से मंज़रे-आम पे न आ सकी थी जिसका उन्हें आख़िरी वक़्त में बेहद मलाल रहा।
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Genres
History
Tags
Literature & Fiction
Arborist Merchandising Root
Self Service
Poetry
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Redgrab Books Pvt Limited
Month-Year
May, 2022
ISBN
ISBN-13: 9789391531607
ISBN-10: 9391531601
Language
Hindi
No. of Pages
170
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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