संपादक सागर यादव जख़्मी
Description
'अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी !
आंचल में है दूध और आंखों में पानी'
राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त की इन पंक्तियों से मैं बिल्कुल भी सहमत नहीं हूँ ।क्योंक
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ि हमारे देश की नारी अबला नहीं सबला है। वह कमजोर नहीं बल्कि इस संसार में सबसे शक्तिशाली, धैर्यवान , ममतामयी एवं त्याग की देवी है। नारी को कमजोर कहना एवं उसकी ममता को उसकी कमजोरी समझना पुरुषों की सबसे बड़ी मूर्खता है। यह कटु सत्य है कि पुरुषों ने नारी को हर युग में अपमानित किया है, उसके साथ छल किया है। उसे प्रताड़ित किया है , उससे उसका वह अधिकार छीना है जिसकी वह हकदार है।वर्तमान समय में भी नारी पर प्रतिदिन असहनीय अत्याचार हो रहे हैं । घर के भीतर , घर के बाहर वे कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। इन घटनाओं के बावजूद नारियाँ साहित्य, राजनीति, सेना, शिक्षा, विज्ञान, ज्योतिष, खगोल से लेकर हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रहीं हैं ।' नारी तुझे सलाम' साझा काव्य संग्रह नारीशक्ति को समर्पित है। इस संग्रह में भारत की 24 प्रतिभाशाली कवयित्रियों की कविताएँ संकलित की गई हैं जो नारी के त्याग, ममता और उसके हौसलों पर आधारित है। हमें आशा नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि इंक़लाब ऑनलाइन पत्रिका द्वारा प्रकाशित यह साझा काव्य संग्रह आपको अवश्य पसंद आएगा।
धन्यवाद ।
सागर यादव जख़्मी
संपादक, इंक़लाब ऑनलाइन पत्रिका
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