Nirmla Mukta Toppo
Description
ना जाने ये कैसी याचना है उस प्रीतम से जिससे अलग हो जाने की कल्पना ही असह्य है । वाकई क्या प्यार इंसान को इतना कमजोर बना देता है? शायद... मगर कभी कभी आ
...
पकी यही कमजोरी आपके सामने आपकी मजबूती बनकर खड़ी हो जाती है । जहाँ तक मैंने मुक्ता जी को समझा है तो यही पाया है कि वक़्त के थपेड़ो नें उन्हें आत्मस्वालम्बी ही नहीं बल्कि एक सशक्त नारी के रूप में स्थापित किया है । मुक्ता टोप्पो जी की ये पहली काव्य संग्रह है, अक्सर रचनाएं अतुकांत हैं, कहीं कहीं शब्दों की पकड़ कमजोर होती नज़र आती है मगर फिर भी वो अपने भावों को पूर्ण रूप से व्यक्त करने में सफल रही हैं । हर लेखक की तरह उन्हें भी अपनी इस काव्य संग्रह से काफी उम्मीदें है और इसमें कोई शक नहीं कि ये पठनीय है ।
Read more
Genres
Literary Fiction
Tags
Literature & Fiction
Arborist Merchandising Root
Self Service
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Sanmati Publishers & Distributors
Month-Year
Jun, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789388365932
ISBN-10: 9388365933
Language
Hindi
No. of Pages
126
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?