Manager Pandey
Description
यह आश्चर्यजनक लगेगा, लेकिन तथ्य है, कि बाबर से लेकर बहादुरशाह जफ़र तक, लगभग सभी मुग़ल बादशाह शायर और कवि भी थे; और उन्होंने फारसी-उर्दू में ही नहीं, ब्र
...
जभाषा और हिंदी में भी काव्य-रचना की । यह पुस्तक प्रमाण है कि जिस भी बादशाह को राजनीति और युद्धों से इतर सुकून के पल नसीब हुए, उन्होंने कवियों-शायरों को सक देने के अलावा न सिर्फ कविताएँ-गजलें लिखी, अपने आसपास ऐसा माहौल भी बनाया कि उनके परिवार कि महिलाएँ भी काव्य-रचना कर सकें । लिखित प्रमाण है कि बाबर की बेटी गुलबदन बेगम और नातिन सलीमा सुल्ताना फारसी में कविताएँ लिखती थीं । हुमायूँ स्वयं कवि नहीं था, लेकिन काव्य-प्रेम उसका भी कम नहीं था । अकबर का कला-संस्कृति प्रेम तो विख्यात ही है, वह फारसी और हिंदी में लिखता भी था । 'संगीत रागकल्पदुम' में अकबर कि हिंदी कविताएँ मौजूद हैं । जहाँगीर, नूरजहाँ, फिर औरंगजेब कि बेटी जेबुन्निसाँ, ए सब या तो फारसी में या फारसी-हिंदी दोनों में कविताएँ लिखते थे । कहा जाता है कि शाहजहाँ के तो दरबार कि भाषा ही कविता थी । दरबार के सवाल-जवाब कविता में ही होते थे । दारा शिकोह का दीवान उपलब्ध है, जिसमे उसकी गजलें और रुबाइयाँ हैं । अंतिम मुग़ल बादशाह जफ़र कि शायरी से हम सब परिचित हैं । उल्लेखनीय यह कि उन्होंने हिंदी में कविताएँ भी लिखी जो उपलब्ध भी हैं । कहना न होगा कि हिंदी के वरिष्ठ आलोचक डॉ. मैनेजर पाण्डेय द्वारा सम्पादित यह संकलन भारत में मुग़ल-साम्राज्य कि छवि को एक नया आयाम देता है; इससे गुजरकर हम जान पाते हैं कि मुग़ल बादशाहों ने हमें किले और मकबरे ही नहीं दिए, कविता की एक श्रेष्ठ परम्परा को भी हम तक पहुँचाया है ।.
Read more