संपादक आराध्या 'अरु'
Description
प्रत्येक प्राणी की दो माँ होती है। एक माँ जो जन्म देती है और दूसरी धरती माँ जो अपनी गोद में स्नेहपूर्वक पाल -पोष कर बड़ा करती है। अपने अन्न , जल एवं वा
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यु प्रदान करती है।हर इंसान को अपनी मातृभूमि प्राणों से भी अधिक प्रिय होती है।हम अपने देश से बाहर विदेशों में भले ही कितने सुख से रह रहे हों। भले ही दुःख का साया भी हम पर न पड़ रहा हो ।फिर भी हमें अपनी मातृभूमि की याद हमेशा सताती है ।अपनी मातृभूमि की रक्षा के खातिर हम अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते। मातृभूमि के प्रति प्रकट यही सच्चा प्रेम ही देशप्रेम है। देशप्रेम की भावना सिर्फ मनुष्यों में ही नहीं बल्कि पशु- पक्षियों में भी समान रूप से पाई जाती है। पशु -पक्षी दिन में भोजन की तलाश में भले ही कितनी दूर निकल जाएं लेकिन शाम को उनका देशप्रेम उन्हें अपनी मातृभूमि पर वापस लौटने को विवश कर देता है। 'मेरी जान तिरंगा है 'साझा काव्य संग्रह' में भारतवर्ष के 25 लोकप्रिय हिंदी रचनाकारों की देशभक्ति कविताएँ सम्मिलित हैं। जो हमारे अंदर देशप्रेम का संचार करती हैं और हमें अपनी मातृभूमि से प्रेम करने की प्रेरणा देती हैं। हमें आशा नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि इंक़लाब प्रकाशन का यह अनुपम देशभक्ति साझा काव्य संग्रह आपको अवश्य पसंद आएगा।
आराध्या 'अरु'
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