Akhilesh 'Bhopal'
Description
मकबूल एक लीकपीटी जीवनी नहीं, एक बेमिसाल जवांमर्द बुजुर्ग कलाकार के बचपन, लड़कपन और इब्तदाई जवानी की अनूठी कहानी है ! इसमें कविता की सी साफ़-शफ्फाफ रवानी
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है, परिन्दाना परवाज है, रसीला अंदाज है ! अखिलेश ने इसे तारीखों और तथ्यों के बोझ से आजाद कर जो बहाव दिया है उसमे से मकबूल की मासूम और शरारती सूरत भी खूब उभरती है और हुसैन की जादूगरी और कारीगरी का आभास भी अपनी बॉस लिये हम तक पहुंचता है ! इस कृति में 'जादुई' विशेषण कई बार प्रयुक्त हुआ है; यही विशेषण इस कृति के लिए, जिसे हुसैन के एक 'रसिये' ने रचा है, भी मुझे मौजूं नजर आता है !
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