Rajendra Yadav
Description
इस किताब में प्रख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव के एक साथ दो लघु उपन्यास ‘मन्त्रविद्ध’ और ‘कुलटा’ संगृहीत है । ‘मन्त्रविद्ध’ प्यार की खुरदरी कहानी हैµआज क
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ी मूर्तिकला की तरह–––तारक और सुरजीत कौर के बीच एक तीसरा ‘व्यक्ति’ और है, और वह है प्यार ! तारक अपने को समझाते हुए, दूसरे आदमी की निगाह से सारी स्थिति को देखता है और स्वयं आतंकित रहता है कि क्या सचमुच वीरता का वह क्षण उसी ने धारण किया था––– ‘कुलटा’ प्यार के एक दूसरे धरातल की व्यथा–कथा है । मिसेज तेजपाल, जैसे अकेले पहाड़ी झरने के एकान्त किनारों और घाटियों की हरियल सलवटों की अँगड़ाई लेती भूलभुलैया–––मखमली बाँहें और रेशमी बाल–––एक अप–टू–डेट अभिजात सौन्दर्यमयी नारी–––लेकिन उसने तो अपने पवित्र प्यार की ही राह चुनी थी । यह स्त्री के अपने चुनाव की कहानी है जिसको हमारा आधुनिक समाज कोई मान्यता नहीं देता । यदि वह अपनी राह स्वयं चुनती है तो उसके लिए कोई क्षमा नहीं है । इसे ही वह चुनौती देती है !–––मिसेज तेजपाल पागल और कुलटा नहीं तो क्या है ?
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Genres
No genres specified
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Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Radhakrishna Prakashan
Month-Year
Sep, 2004
ISBN
ISBN-13: 9788171198559
ISBN-10: 8171198554
Language
Hindi
No. of Pages
177
Format
Paperback
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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